CRACKDOWN WEBSERIES REVIEW 2020

Web Series Review: क्रैकडाउन
लेखक: सुरेश नायर, चिंतन गांधी
निर्देशक: अपूर्व लखिया
कलाकार: साकिब सलीम, श्रिया पिलगांवकर, इकबाल खान, वलुश्चा डिसूजा, अंकुर भाटिया और राजेश तेलंग
ओटीटी: वूट सेलेक्ट

Director: ApoorvaLakhia Cast: SaqibSaleem as Riyaz Pathan, ShriyaPilgaonkar as Divya Shirodkar, IqbalKhan as Zorawar Kalra, WaluschaDeSousa as Garima Kalra, RajeshTailang as Ashwini Rao, AnkurBhatia as Tariq, Tanya Desai, Tauqeer Alam, Vipin Bharadwaj, Mudasir Bhat, Harry Parmar, Gawhar khan, Saba Saudagar, Ram Menon, Ajay Choudhary, Amal Sherawat, Rohtas Nain, Shreyas Zutchi, Akshun Vashisht, Arry Dabbas, Kalpana.

हेल्लो फ्रेंड्स वेलकम  टू फिल्मी रिव्यु ऑफ़ क्रैकडाउन यह वेब सीरीज आप देख सकते है वूट ओरिजनल पर . इसमे कुल 8 एपिसोड है जो की 30,35 मिनिट लम्बे है पूरी सीरीज 4 से 5 घंटे के बीच की है . आइये जानते इसकी स्टोरी.

कहानी हमारे देश को अनजाने खतरों से बचाने वाले कुछ मुट्ठी भर रियल हीरो के अराउंड लिखी गई है. एक खतरनाक आतंकवादी ग्रुप के अगेंस्ट सीक्रेट ऑपरेशन चलाने की तैयारी कर रहे हैं लेकिन इस बार खतरा सिर्फ सिंगल नही डबल है क्योंकि दुश्मन से बाहर नहीं घर के अंदर घुस कर बैठा हुआ है जी हां सीक्रेट एजेंट से डिपार्टमेंट में एक ऑफिसर गद्दार बन चुका है जो पूरे प्लान की छोटी-छोटी इंफॉर्मेशन देश के पास बैठे हुए आतंक के आकाओं तक पहुंचाने की जिम्मेदारी पूरी शिद्दत से निभा रहा है.

यहां से कहानी में सफाई अभियान की शुरुआत हो जाती है एक मिशन है देश में होने वाले खतरनाक हमले को किसी भी तरीके से फेल करना तो दूसरा खुद के डिपार्टमेंट में छुप कर बैठे हुए जासूस को बेनकाब करना लगता है चालाकी और बहादुरी के इस खेल में जीत किसकी होने वाली है जान को दांव पर लगाकर देश के लिए कुर्बान होने वाले हीरो की या फिर बेगुनाहों को तड़पा खुशियां बटोरने वाले मक्कार विलंस की आखिर ये जानलेवा अटैक का मास्टरमाइंड है कोन किस तरीके से इस पुरे प्लान को अंजाम दिया जाएगा और सबसे बड़ा सवाल वो गद्दार कौन है जो देश की सुरक्षा को गुलाबी नोटों के बदले बेच चुका है सारे जवाब मिलेंगे वूट पे

किसी भी शो को सफल बनाने के लिए जिस चीज की सबसे ज्यादा जरूरत पड़ती है वह सच्चाई रियलिस्टिक सिनेमाज उसको देखते वक्त की कहानी पर यकीन करने के लिए मजबूर हो जाओ और असली दुनिया को भूल कर फिक्शनल कहानी को हकीकत मान लो क्रैकडाउन में रियलिटी की रत्ती भर छोटी सी भी झलक तक नजर नहीं आती है ऐसा लगता है जैसे स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को सर्दियों की छुट्टी के असाइनमेंट में कहानी लिखनी थी और वह फेमस बुक और एक्शन मूवीस की नकल से होमवर्क को पूरा कर लेते हैं ना तो इस कहानी की शुरुआत है और न एंडिंग तो भूल ही जाए ऊपर से सेकंड सीजन की तरफ इशारा करके शो के मेकर आपके जख्मो पर नमक छिड़कते है वो अलग ऊपर से हर दूसरे डायलॉग में हिंदी अंग्रेजी की गालियों को घुसाना को भी सीनियर ऑफिसर की भाषा में मेरी समझ से बिल्कुल बाहर है मतलब आप देश की सिक्योरिटी कंट्रोल कर रहे हो और बातें खाली बोतल से लड़ने वाले शराबीयो जैसी है.

स्पेशल ऑप्स जैसी सीरीज हमारी इंडियन सिनेमा के लेवल को एक नई पहचान की तरफ बढ़ रही है वहीं क्रैकडाउन आधा अधूरा बिना लॉजिक वाला शो जो हमारे ओटीटी प्लेटफॉर्म के चेहरे पर कालिख पोतने का काम कर रहा है शो के जो लीड एक्टर है शकीब सलीम वो अपने गुरु जी के रास्ते पर चलते हुए सीरीज में इतनी खतरनाक ओवरएक्टिंग का प्रदर्शन कर रहे हैं जिससे आपकी आंखों पर लगने वाले दाग लाइवजोल तो छोड़िए तेज़ाब से साफ़ नहीं होंगे इनका बोलने का ढंग हो या एक्शन सीन्स इसमें देशभक्ति कम हीरोपंती ज्यादा नजर आती है ऐसा लगता है जैसे मानो रेस 3 की दिल और डेल वाली दुनिया से अभी बाहर ही नहीं निकले हैं लेकिन सबसे ज्यादा जहरीले हैं इस में डाले गए विसुअल इफ़ेक्ट जिसको बयान करने के लिए नकली और फर्जी जैसे शब्द भी बेमान से लगते है बंदूक से निकली गोली हो या शरीर से टपकता खून या फिर धमाके से उड़ने वाले ऑफिस के चिथड़े हर चीज आपको बचपन वाले वीडियो गेम कॉन्ट्रा की याद दिलाती है.

लेकिन श्रेयागिल और राजेश तिलक की परफॉर्मेंस जबरदस्त है दोनों की कैरेक्टर भले ही कहानी में सही ढंग से नहीं बुने गए हैं लेकिन जब जब इस स्क्रीन पर आते हैं आप को डूबते को तिनके का सहारा वाली कहावत याद आ जाती है यार तो कम शब्दों में बोलूं तो क्रैकडाउन में आपको कुछ भी नया या फिर यूनीक देखने को नहीं मिलेगा और हां लॉजिक रियालिटी एक्टिंग इन शब्दों का दूर-दूर तक कोई लेना देना नहीं है बस रेस 3 की यादें ताजा करना चाहते तो जरूर देखिए बस घर वालों को अलविदा बोल देना क्योंकि 4 घंटे के बाद आप दूसरी दुनिया में पहुंच चुके होंगे मेरी तरफ से क्रैकडाउन को पांच में से एक स्टार बात करूं नेगेटिव की तो एक स्टार कटेगा नकली कहानी के लिए एक साथ बचकानी गालियों से भरे डायलॉग के लिए एक स्टार नकलीपन के ब्रांड एम्बेसडर बन चुके विजुअल इफेक्ट्स के लिए और 1 स्टार साकिब सलीम की आंखें डोनेट करने पर मजबूर करने वाली एक्टिंग के लिए.

 

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